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Monday, April 12, 2010

नशा ...

नशा ...
तुम्हारी बातों का
हुलस्ती इच्छाओं का
मेरे तुम्हारे दरमियान
सिमटे अनकहे लफ़्ज़ों का 
नशा ...
तुम्हारी साँसों की खुशबू का
ठन्डी छुअन का
लरजती उँगलियों का
नशा ...
जो मर कर जीया
उस पल का
जो गुज़र के भी नहीं गुज़रा
उस लम्हे का...
नशा ...
मुझको जो पूरा  कर गया
उस तारुफ्फ़ का
मुक्कमल बना  गया
जो हर अरमान
उस अनदेखे साथ का
नशा ...
परत दर परत
सांस लेते अरमानो का
खामोश बेखुदी का
नशा ....
जिस्म को आर पार काटती निगाह का
सिर्फ तुम्हारे होने के  उस एक एहसास का
नशा ...
अब जो जीने की वजह बन गया
posted by Reetika at 4/12/2010 01:29:00 AM

25 Comments:

nasha hai har lafz me

April 12, 2010 1:36 AM  

bahut hi behatareen rachana--------

poonam

April 12, 2010 5:48 AM  

बहुत उम्दा अभिव्यक्ति!!

April 12, 2010 9:45 AM  

one of the best ones from you!

April 12, 2010 5:37 PM  

परत दर परत
सांस लेते अरमानो का
खामोश बेखुदी का
जिस्म को आर पार काटती निगाह का
सिर्फ तुम्हारे होने के एक उस एहसास का
नशा ...
अब जो जीने की वजह बन गया
Badehi sundar,nazuk bhaav!

April 13, 2010 3:20 AM  

हमेशा की तरह उम्दा रचना..बधाई.

April 13, 2010 11:33 AM  

reetika ji

poori kavita me ek ajab sa nasha chaaye hua hai ,jo shabdo ke jariye man me apna ghar bana raha hai ...kya kahu ...just kudos for such a wonderful writing .. maine abhi aapki pichli poems bhi padhi ...har kavita ka apna jaadu hai ,apne ahsaas hai ,waah ji waah

aabhar

vijay
- pls read my new poem at my blog -www.poemsofvijay.blogspot.com

April 13, 2010 5:35 PM  

हरकीरत जी के ब्लाग के माध्यम से आपके ब्लाग तक पहुंचा। आपके ब्लाग पर भ्रमण कर अच्छा लगा।खूबसूरत रचनाएं पढ़ने को मिली।आपका रचना संसार रुचा।बधाई!

April 14, 2010 4:12 AM  

hmm..nice one

April 15, 2010 3:49 PM  

ending was superb...

नशा ...
अब जो जीने की वजह बन गया

waah!!

April 16, 2010 10:27 AM  

very nice

April 21, 2010 4:52 PM  

Bahut hee saleeke se bhavanaon ko apne shabdon men bandha hai---achchhee lagee kavita.

April 22, 2010 3:58 PM  

bahut hi achhi rachna hai reetika ji............

mere blog ar aane ke liye shukriya......
www.saaransh-ek-ant.blogspot.com

April 29, 2010 2:21 PM  

रितिका आपकी लिखने में है नशा ... जनवरी में हैदराबाद आई थी ... तब जानती तो मिलती जरुर .... खैर ऊपर वाले ने सब मुलाक़ात का समय फिक्स किये हुआ है ... अब नहीं तो फिर कभी सही ...

April 29, 2010 8:47 PM  

bahut khoobsurt
behatareen likhati hain aap.

May 02, 2010 1:42 AM  

Awesome!

May 02, 2010 1:42 AM  

वाह....कितना नशा है ना इन शब्दों में.....सुन्दर अभिव्यक्ति ....नज़्म अच्छी लगी

मेरे ब्लॉग पर आने का शुक्रिया

May 02, 2010 6:52 PM  

बहुत गहराई है आपकी बातों में ! सुन्दर रचना!

May 03, 2010 2:27 AM  

reetika ji , aapke blog ko follow kis tarah kiya ja sakta hai ?

May 03, 2010 2:29 AM  

बहुत खूब .....!!

May 03, 2010 7:07 PM  

ब्लाग पर आना सार्थक हुआ
काबिलेतारीफ़ प्रस्तुति
आपको बधाई
सृजन चलता रहे
साधुवाद...पुनः साधुवाद
satguru-satykikhoj.blogspot.com

May 03, 2010 8:42 PM  

क्या कहने साहब
जबाब नहीं
प्रसंशनीय प्रस्तुति
satguru-satykikhoj.blogspot.com

May 03, 2010 8:42 PM  

क्या एक जाम और मिलेगा?????

बहुत अच्छे.....

May 14, 2010 10:55 PM  

Aap sabhi ka tah- e - dil ka shkuriya ...

May 18, 2010 6:35 PM  

होली की अपार शुभ कामनाएं...बहुत ही सुन्दर ब्लॉग है आपका....मनभावन रंगों से सजा...

March 12, 2011 2:41 PM  

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