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Wednesday, March 31, 2010

सवाल सिरफिरा सा...

सनसनाती चाहतें
बेलगाम  मोहब्बतें
क्या वाकई होती है अलेहदा ?
पिघलती, सिमटती ...
यादों की चिलमन के परे
ज़ेहन में रिसते हैं
वक़्त के हमशक्ल बेनाम कतरे
सफहा सफहा जिंदा सा लगता है
हर जज्बा एक सा ही तो लगता है
पर...
मोहब्बत तो शायद सिर्फ एक बार ही होती है
चाहतों का क्या है ...
हर पल, हर पहर
गर्म जज्बातों का मुल्लमा चढ़ाये
यकबयक टकरा  ही जाती है
आज फिर वो ही पुराना मसला है
दबा, सिसका, थमा सा सिलसिला है
सिर्फ चाहत है या  ये है मोहब्बत
सवाल  सिरफिरा सा
ज़िन्दगी के आईने में
मुंह बाए खड़ा है ...
posted by Reetika at 3/31/2010 12:48:00 AM

15 Comments:

bahut umda...
waise to mujhe kavitao me koi khas maja nahi aata..par is blog ko padh kafi accha laga...

March 31, 2010 2:13 AM  

वाह .....Reetika जी गज़ब का लिखतीं हैं आप .......!!

March 31, 2010 3:50 AM  

बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

March 31, 2010 3:50 AM  

उम्दा रचना!

March 31, 2010 9:09 AM  

:( ye to urdu mein thi samajh nahin aayi :(

March 31, 2010 1:55 PM  

Aap Sabhi ka tah-e- dil se shukriya!

March 31, 2010 11:46 PM  

mashallah! bahut khoob shabdo ka sanyojan

आज फिर वो ही पुराना मसला है
दबा, सिसका, थमा सा सिलसिला है
सिर्फ चाहत है या ये है मोहब्बत
सवाल सिरफिरा सा
ज़िन्दगी के आईने में
मुंह बाए खड़ा है ...

hoon...yahi sawaal yaha bhi hai :-)

word verification remove kariye ...comment karne mein problem hoti hai

April 01, 2010 1:56 AM  

wah wah wah
kya khoob likha hai aapne :)
jaise dil ke jazbaat ko alfaaz mil gae..aur udd chale khulle neel gagan mein..preetam ki aur...

wah wah wah

April 08, 2010 1:21 AM  

सवाल सिरफिरा सा...
सनसनाती चाहतें
बेलगाम मोहब्बतें
क्या वाकई होती है अलेहदा ?
पिघलती, सिमटती ...
यादों की चिलमन के परे
ज़ेहन में रिसते हैं
वक़्त के हमशक्ल बेनाम कतरे
सफहा सफहा जिंदा सा लगता है
हर जज्बा एक सा ही तो लगता है
पर...
मोहब्बत तो शायद सिर्फ एक बार ही होती है
चाहतों का क्या है ...
हर पल, हर पहर
गर्म जज्बातों का मुल्लमा चढ़ाये
यकबयक टकरा ही जाती है
आज फिर वो ही पुराना मसला है
दबा, सिसका, थमा सा सिलसिला है
सिर्फ चाहत है या ये है मोहब्बत
सवाल सिरफिरा सा
ज़िन्दगी के आईने में
मुंह बाए खड़ा है ...
rachna bahut achchhi lagi aur aapka aana bhi .

April 08, 2010 1:57 AM  

आज फिर वो ही पुराना मसला है
दबा, सिसका, थमा सा सिलसिला है

सुंदर ....!!

April 09, 2010 7:04 PM  

Behichak kaha ja sakta hai: Maza aa gaya!
Sawaal to uthaya hai mohtarma, jawab bhi dijiye!
Umda khyal aur behatareen lafz!

April 09, 2010 10:12 PM  

@ Priya, Prerama, Jyoti & Heer...

Shukriya ..

April 10, 2010 1:52 AM  

This comment has been removed by the author.

April 10, 2010 1:52 AM  

यकबयक टकरा ही जाती है

वाकई बेहतरीन !!

April 10, 2010 2:33 AM  

behad achhi rachna.....muhabbat aur chahat ki beech ke maddham si lakeer kheenchti hui ...badhiy ahai ji ...bahut badhiya

April 15, 2010 3:50 PM  

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